करवा चौथ की वो खौफनाक रात... जब एक प्यासी रूह सुहाग नहीं, मर्दों की रूह चूसने लौटी।
राघव शहर से भागकर गांव लौटा था, लेकिन उसका पीछा एक खौफनाक सपना कर रहा था। लाल पारदर्शी चुनरी में लिपटी एक मादक औरत... जो उसे अपने पास बुलाती थी।
रात के 12 बजे... वही औरत सच में उसके सामने खड़ी थी। बारिश में भीगा उसका जिस्म और वो कातिलाना मुस्कान, जो किसी भी मर्द का ईमान डिगा दे।
वो कोई और नहीं, राघव का पुराना प्यार 'गौरी' थी। जिसने राघव के धोखे के बाद कुएं में कूदकर जान दे दी थी। लेकिन आज... उसकी आँखों में मौत की हवस थी।
वो कोई और नहीं, राघव का पुराना प्यार 'गौरी' थी। जिसने राघव के धोखे के बाद कुएं में कूदकर जान दे दी थी। लेकिन आज... उसकी आँखों में मौत की हवस थी।
गौरी ने अपने बर्फीले होंठ राघव के करीब लाए। उसके जिस्म से चमेली और मौत की गंध आ रही थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा— "तुमने कहा था लौटोगे... अब मेरी प्यास कौन बुझाएगा?"
क्या गौरी के इस नशीले चुंबन ने राघव की जान ले ली? या वासना के इस अंधेरे में उसे मिली मौत से भी खौफनाक सजा?