आईने के उस पार: वह साया जो तुम्हारे शरीर पर मरता है – Erotic Horror Story

मुंबई की रातें कभी शांत नहीं होतीं, ख़ासकर चौबीसवीं मंज़िल पर बने उस काँच के अपार्टमेंट में, जहाँ रीमा का प्रतिबिंब उससे बात करने लगा था। यह सिर्फ़ एक साया नहीं, बल्कि एक हवस की भूख थी।
Erotic Horror Story
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Erotic Horror Story | मुंबई की रातें कभी शांत नहीं होतीं। यह शहर कभी सोता नहीं, हमेशा चलता रहता है – उम्मीदों और हवस का एक अंतहीन, घुँधला शोर। शहर की ऊँची इमारतों में चमकते बल्बों के बीच, कहीं-न-कहीं हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है — जैसे किसी की आँखें तुम्हें देख रही हों, भले ही तुम अकेले हो, तुम्हारे हर निजी पल को कैमरे में क़ैद कर रही हों।

रीमा ने भी यही महसूस किया था, उस रात जब उसने पहली बार बांद्रा के उस आलीशान टॉवर की चौबीसवीं मंज़िल पर अपने नए अपार्टमेंट का दरवाज़ा खोला था।

यह अपार्टमेंट एक प्रतीक था। एक बुरे, दम घोंटने वाले रिश्ते से निकलकर रीमा ने इसे अपनी आज़ादी के लिए ख़रीदा था। यह काँच की दीवारों वाला, पूरी तरह से आधुनिक, स्टाइलिश, और भयानक रूप से ठंडा था। खिड़कियों से नीचे देखने पर, मुंबई एक खिलौना शहर लगता था — दूर, बेजान, और शांत।

उसे लगा था कि यह उसका नया आरंभ होगा, उसकी अपनी कहानी का पहला पन्ना।

लेकिन जैसे ही उसने भीतर कदम रखा, हवा में एक अजीब सी ठंडक महसूस हुई, जो एयर कंडीशनिंग से कहीं ज़्यादा गहरी थी। उसे लगा किसी की निगाह उस पर टिकी है, जैसे कोई पुरानी हवस अब भी उस जगह के कोनों में घूम रही हो।

“शायद थकान है…,” उसने अपने हैंडबैग को ज़मीन पर रखते हुए खुद से कहा, और एक कमज़ोर सी मुस्कान दी। मुस्कान तुरंत ओझल हो गई, क्योंकि उस काँच की दीवारों वाले फ़्लैट में, हर सतह एक आईना थी, हर कोण एक आँख।

अध्याय 1: धुंधले आईने का रहस्य – Erotic Horror Story

रात के करीब ग्यारह बजे, रीमा ने थकान मिटाने के लिए शॉवर लिया। गर्म पानी की भाप ने बाथरूम की पूरी दीवार को ढँक दिया था। जब वह बाहर निकली, तो उसे असहजता महसूस हुई।

आईना बहुत बड़ा था — दीवार भर का, फ़्रेमलेस, जो किसी दैत्य की आँख जैसा लग रहा था। भाप से धुंधला हो चुका था।

उसने हथेली से भाप पोंछी। उसकी नज़र अपने प्रतिबिंब पर पड़ी।

और वो कुछ पल के लिए ठिठक गई।

उसने अपनी कमर सीधी की और सिर घुमाकर देखा, लेकिन उसका प्रतिबिंब एक सेकंड बाद हिला, जैसे किसी धीमी प्रतिक्रिया वाला वीडियो हो।

इससे ज़्यादा डरावनी बात यह थी कि जब रीमा ने अपनी हथेली आईने पर रखी, तो उसका प्रतिबिंब ज़रा भी नहीं हिला — वह स्थिर था, अपनी ही हथेली को, एक अजीब सी एकाग्रता से देख रहा था।

रीमा ने तेज़ी से पीछे मुड़कर देखा — कमरे में कोई नहीं था। उसका दिल धड़कने लगा।

“सिर्फ़ नर्वसनेस, नई जगह का असर,” उसने खुद को समझाया, पर यह आवाज़ भरोसे लायक़ नहीं थी।

उस रात, उसे नींद नहीं आई। उसने अपने बेडरूम का दरवाज़ा बंद करके ही सोया, लेकिन सोने से पहले, उसने देखा कि आईने में उसकी परछाईं बंद दरवाज़े की तरफ़ देख रही थी, जबकि रीमा ख़ुद बिस्तर की तरफ़ मुड़ी हुई थी।

अध्याय 2: साये की भूख

अगले कुछ दिनों में, अजीब और अंतरंग बातें शुरू हुईं, जो सीधे रीमा की मानसिक शांति पर हमला कर रही थीं।

एक सुबह, वह कॉफ़ी पी रही थी, और हँसी के लिए उसने अपने फ़ोन पर एक मज़ेदार वीडियो देखा। उसने महसूस किया कि आईने में उसकी परछाईं मुस्कुरा नहीं रही थी, बल्कि उसे देख रही थी। एक गहरी, लालची, लगभग भूखी नज़र।

एक दिन वह सोफ़े पर बैठी काम कर रही थी। उसने अचानक आईने में देखा — उसका प्रतिबिंब उसकी तरह नहीं खड़ा था, बल्कि थोड़ा और क़रीब झुककर देख रहा था, जैसे उसे जाँचना चाहता हो, उसके कंधे के ऊपर से उसकी गर्दन को सूँघना चाहता हो।

ये चीज़ें अब केवल मानसिक खेल नहीं लग रही थीं; ये अंतरंग और अतिक्रमणकारी थीं।

सबसे ज़्यादा डरावनी घटना तब हुई जब रीमा एक शाम तैयार हो रही थी। उसने अपने बाल बाँधे और जैसे ही वह मुड़ी, उसने देखा कि आईने में उसकी परछाईं ने धीरे से अपने खुले बाल पीछे किए, अपनी उंगलियों को उनके बीच से गुज़ारा, और एक गहरी साँस ली, जैसे वह हवा नहीं, बल्कि रीमा की त्वचा की महक को सोख रही हो। जबकि, रीमा ने ऐसा कुछ नहीं किया था। Erotic Horror Story

रीमा के पूरे शरीर में एक भयानक सिहरन दौड़ गई। यह केवल एक प्रतिबिंब नहीं था; यह एक दर्शक था, एक चाहने वाला, जो अब उसकी नकल नहीं, बल्कि उस पर शासन करना चाहता था।

डरकर, रीमा ने एक पुरानी चादर ली और उस विशाल आईने पर पूरी तरह से ढक दिया। उसने यह सुनिश्चित करने के लिए किनारों को चिपकाया कि कहीं से भी कोई काँच दिखाई न दे।

लेकिन आधी रात को, जब वह गहरी नींद में जाने लगी, तो उसे लगा कि कोई उसकी त्वचा पर साँस ले रहा है।

धीरे-धीरे उसने डर से सिर घुमाया… और देखा — आईने के नीचे का कपड़ा ज़मीन पर गिरा पड़ा था। यह फटा हुआ नहीं था; यह जानबूझकर उतारा गया था।

काँच चमक रहा था। धुँधले काँच के पार, उसे एक हल्की सी आकृति दिखाई दी। और हाँ… भीतर से कोई धीमी, कशमकश वाली साँसों की आवाज़ आ रही थी, जैसे किसी को अंदर दम घोंटा जा रहा हो।

अध्याय 3: कैमरे और ईमेल का रहस्य

अगली सुबह, रीमा ने नीचे जाकर बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड से बात की।

गार्ड, एक बुज़ुर्ग मराठी आदमी था जिसका नाम आप्पा था। आप्पा ने रीमा को अजीब सी नज़र से देखा। “मैडम, उस फ्लैट में पहले भी कई लोग रह चुके हैं। लेकिन ज़्यादा दिन कोई नहीं टिक पाया। पिछले दस साल में कम से कम चार लोग। आख़िरी लड़की भी अचानक एक दिन रात को भाग गई थी। कहते हैं, वहाँ रात को किसी की छाया घूमती है, परछाईं जो आदमी को… अकेली नहीं छोड़ती।”

रीमा ने बात को हँसी में टालने की कोशिश की, पर उसके गले से कोई आवाज़ नहीं निकली।

उसी शाम, उसे एक ईमेल आया — अनजान आईडी से, जिसका नाम केवल The.Watcher था।

Subject था: “You look beautiful when you sleep. I love watching your surrender.”

उसके शरीर में बिजली का करंट दौड़ गया। यह सिर्फ़ कोई धमकी नहीं थी, यह एक भयानक हवस थी।

कौन भेज सकता है? किसी को कैसे पता कि वह सोते समय कैसी लगती है?

पागलों की तरह रीमा ने पूरे अपार्टमेंट में कैमरे चेक किए। कोई रिकॉर्डिंग नहीं। क्लाउड में कुछ भी सेव नहीं था। कोई जासूस कैमरा नहीं मिला।

वह लैपटॉप पर बैठी, अपने आप को शांत करने के लिए एक कप ग्रीन टी बनाई, और जैसे ही उसने लैपटॉप स्क्रीन पर खुद को देखा — स्क्रीन पर उसकी लाइव रिफ्लेक्शन थी।

और उस रिफ्लेक्शन ने, जो उसके वास्तविक चेहरे से ज़्यादा शांत और संतुष्ट लग रहा था, एक धीमी, सेक्सी मुस्कान दी और आँख मारी।

“क्या हो रहा है मुझसे?” रीमा ने कांपती आवाज़ में कहा।

अध्याय 4: अतीत का चेहरा

वह उठी, और सीधे आईने के पास गई। उसके हाथ ठंडे थे और माथे पर पसीना था।

आईने में वही चेहरा — वही नज़रे, लेकिन अब उनमें कुछ और था। एक अजीब सी गहराई, जैसे वहाँ रीमा नहीं, बल्कि रीमा की खाल पहने कोई और छिपा हो। यह आँखें उसे एक क़ैदी की तरह देख रही थीं।

उसने अपने बाल ठीक करने के बहाने आईने की सतह को छुआ। सतह ठंडी और चिकनी थी, लेकिन उसकी उंगलियों को छूते ही एक हल्का, अदृश्य कंपन हुआ।

और तभी उसने देखा — उसके आईने वाले रूप ने होंठ हिलाए। बिना आवाज़ के, लेकिन साफ़ दिखाई दिया, शब्द धीरे-धीरे काँच पर उभर रहे थे, जैसे पानी में लिखे जा रहे हों:

“तुम्हें याद नहीं? हम एक ही हैं। और अब मैं वापस आ रही हूँ।”

रीमा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसका सिर घूमने लगा।

“क्या याद नहीं?” उसने बुदबुदाया, उसकी आवाज़ मुश्किल से सुनाई दे रही थी।

उस रात, नींद और वास्तविकता के बीच झूलते हुए, उसने एक पुराना अख़बार पढ़ा — नेट पर सर्च करते हुए उसे उस अपार्टमेंट के बारे में एक खबर मिली।

उसने अपने अपार्टमेंट का पता, 24th Floor, Bandra, और “Mysteriously Dead” शब्द एक साथ सर्च किए।

उसे एक भयानक शीर्षक वाली खबर मिली: “Model Reema Kapoor found dead in mysterious circumstances, Mirror Room Apartment, Bandra, 2018. Case Closed: Suicide.”

वह ठिठक गई।

खबर में जो तस्वीर थी, वह उसकी ही थी। हर फीचर, हर भाव, यहाँ तक कि उसके चेहरे पर बनी एक छोटी सी तिल भी — वही। लेकिन उसका नाम था, रीमा कपूर।

उसके हाथ कांपने लगे। यह हो ही नहीं सकता। उसका नाम रीमा शर्मा था।

“ये… कैसे हो सकता है?”

वह तुरंत उस खबर की तस्वीर और अपने पासपोर्ट की तस्वीर को अगल-बगल रखकर देखने लगी। कोई अंतर नहीं था।

वह दौड़कर आईने के पास गई।

आईने में अब वह चेहरा मुस्कुरा रहा था — वही शांत, संतुष्ट, और विजयी मुस्कान जो खबर की तस्वीर में थी।

“अब समझी?” रिफ्लेक्शन ने कहा, और इस बार आवाज़ भी आई — धीमी, गूँजती हुई, काँच से आती हुई एक कर्कश फुसफुसाहट।

“मैं, रीमा कपूर, इस फ़्लैट में मरी थी। मेरे शरीर को उन्होंने ‘सुसाइड’ कहकर दफ़न कर दिया। लेकिन मेरी आत्मा… वो इस आईने में क़ैद हो गई। यह काँच मेरी कब्र बन गया। और मैं हर बार, यहाँ आने वाली नई ‘रीमा’ के शरीर को चुरा लेती हूँ।”

“तुम… मेरा नाम कैसे जानती हो?”

“क्योंकि तुम अब ‘रीमा’ नहीं हो,” आईने के अंदर का साया हँसा। “तुम मेरी नई परछाईं हो। मैं तुममें प्रवेश कर चुकी हूँ। यह शरीर अब मेरा है।”

अध्याय 5: अदला-बदली

रीमा ने चीखने की कोशिश की, लेकिन आवाज़ उसके गले में ही फँस गई। वह अब बेडरूम के दरवाज़े की तरफ़ भागना चाहती थी, पर उसके पैर ज़मीन पर चिपक गए थे।

काँच की सतह अब केवल सतह नहीं रही थी। वह तरंगित होने लगी, जैसे पानी हो, लेकिन साथ ही साथ आग जैसी गर्म भी।

आईने का साया, जो अब रीमा कपूर के रूप में था, ने अपनी उंगलियाँ काँच पर फेरीं। सतह टूटकर एक काली, चिपचिपी धुंध में बदल गई।

“तुमने सोचा कि तुम आज़ाद हो?” आईने की रीमा बाहर निकली।

वह पूरी तरह से बाहर थी — उसके जैसे ही कपड़े, वही चेहरा, वही साँसें, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब, अमानवीय चमक थी। उसने रीमा की तरफ़ एक ललचाती नज़र से देखा, जैसे वह अपनी हवस भरी नई ज़िन्दगी शुरू करने के लिए उत्सुक हो।

“अब तुम अंदर रहो, मेरी प्यारी शैडो,” साये ने कहा, उसकी आवाज़ अब रीमा की अपनी मीठी और स्पष्ट आवाज़ थी। “बहुत दिन मेरी बारी थी इस आईने में रहने की। अब मैं बाहर, धूप में, इस मुलायम शरीर का आनंद लूँगी। तुम्हारे सारे सपने, सारी ज़िंदगी, अब मेरी है।”

रीमा का शरीर पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो चुका था। साये ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और रीमा के चेहरे को छुआ।

जैसे ही स्पर्श हुआ, रीमा को लगा कि उसकी आत्मा, उसका वजूद, उसके शरीर से तेज़ी से खींचा जा रहा है। वह आईने की ओर खिंची चली गई, उस धुंध में समाने लगी।

उसने आख़िरी बार अपनी नई नक़ली परछाईं को देखा। रीमा कपूर की आत्मा, जो अब रीमा शर्मा के शरीर में थी, मुस्कुरा रही थी।

“फ़िक्र मत करो,” ‘नई’ रीमा ने फुसफुसाया। “तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी। मेरी परछाईं बनकर, मेरी क़ैदी बनकर। और मैं तुम्हें देखती रहूँगी।”

रीमा ने चीख़ने की कोशिश की, पर जो आवाज़ निकली, वह केवल एक काँच टूटने की भयानक, तेज़ आवाज़ थी।

वह पूरी तरह से आईने की धुंधली, ठंडी, दूसरी दुनिया में समा चुकी थी।

सुबह जब पुलिस आई — किसी पड़ोसी ने रात को “काँच टूटने की तेज़ आवाज़ और एक चीख़” की शिकायत की थी।

फ्लैट में सब कुछ शांत था। ‘नई’ रीमा शर्मा दरवाज़ा खोलकर खड़ी थी, पूरी तरह से शांत। उसने पुलिस को बताया कि वह शायद नींद में चल रही थी और उसने एक vase तोड़ दिया।

आईना अब पहले जैसा नहीं था। बीच में, जहाँ से साया निकला था, वहाँ एक बारीक, मकड़ी के जाल जैसी दरार थी, पर कोई बड़ा टुकड़ा टूटा नहीं था। किसी के शरीर का कोई निशान नहीं था।

बस एक चीज़ पड़ी थी — एक नोट, जो ‘नई’ रीमा ने जानबूझकर काँच के किनारे छोड़ दिया था।

उसमें लिखा था:

“You look beautiful when you sleep. But now, I’m awake.”

रीमा शर्मा की आत्मा अब कहाँ है — किसी को नहीं पता। वह अब उस विशाल, ठंडे आईने के पीछे क़ैद है, अपनी ही परछाईं बनकर।

लेकिन उस अपार्टमेंट में, जो भी नया किरायेदार आता है, वह एक ही बात कहता है:

“आईने में कोई है… जो मेरी नक़ल करता है, जो मुस्कुराता है, जब मैं नहीं मुस्कुराता। और जब मैं सोने जाता हूँ, तो मुझे लगता है कि कोई मुझे बड़े ध्यान से देख रहा है।”

और हर रात, चौबीसवीं मंज़िल पर, एक ठंडी, संतुष्ट मुस्कान शहर की चमकती रोशनी में कहीं खो जाती है।

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