Real Horror Story in Hindi | यह घटना 2015 के नवंबर महीने की है, जब सर्दियों की शुरुआत हो रही थी। कहानी है समीर की, जो पुणे (महाराष्ट्र) के पास एक छोटे से कस्बे, जुन्नार, में टैक्सी चलाता था। समीर करीब 30 साल का मेहनती लड़का था, जिसकी अपनी छोटी सी फैमिली थी—पत्नी और एक प्यारी सी बेटी। रात में काम करना उसकी मजबूरी थी, क्योंकि दिनभर की कमाई परिवार के खर्चों के लिए काफी नहीं होती थी।
उस रात समीर जुन्नार के मुख्य बस स्टैंड पर अपनी पुरानी मारुति ओमनी वैन में बैठा, आखिरी सवारी का इंतज़ार कर रहा था। रात के 11:45 बज चुके थे और ठंड काफी बढ़ गई थी। बस स्टैंड अब लगभग सुनसान हो चुका था। समीर ने सोचा कि अब घर लौट जाना चाहिए।
तभी, बस स्टैंड के अंधेरे कोने से एक आदमी बाहर निकला। वह देखने में बहुत साधारण था—करीब 50-55 साल का, सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर एक टोपी। उसका चेहरा इतना उदास था कि समीर को एक पल के लिए दया आ गई। उस आदमी ने समीर की वैन को रुकने का इशारा किया।
समीर ने गाड़ी रोकी। जैसे ही वह आदमी पिछली सीट पर बैठा, समीर को एक अजीब सी महक आई, जैसे पुरानी मिट्टी और बासी फूलों की मिली-जुली गंध।
“कहाँ जाना है, बाबूजी?” समीर ने पूछा।
उस आदमी ने धीमी, लगभग फुसफुसाहट वाली आवाज़ में कहा, “मुझे आगे छोड़ दो। बस 101 किलोमीटर तक ले चलो।”
समीर ने तुरंत जवाब दिया, “101 किलोमीटर? यहाँ से 101 किलोमीटर पर तो शिरडी पड़ता है! क्या आपको शिरडी जाना है?”
यात्री ने न तो हाँ कहा और न ही ना। उसने सिर्फ इतना कहा, “वहाँ पहुँचकर मैं तुम्हें बता दूँगा। चिंता मत करो, तुम्हें किराया पूरा मिलेगा। बस चलो।”
समीर थोड़ा हिचकिचाया। इतनी रात को शिरडी का रास्ता सुनसान होता था, और यह यात्री बहुत अजीब लग रहा था। लेकिन पैसे की जरूरत ने उसे हाँ कहने पर मजबूर कर दिया। “ठीक है, बाबूजी,” समीर ने कहा और मीटर ऑन कर दिया। वैन चल पड़ी।
अंधेरी रात और खामोश यात्री: सस्पेंस की शुरुआत
जुन्नार से शिरडी का रास्ता सुनसान और घुमावदार है। जैसे ही वे शहर की सीमा से बाहर निकले, सड़कों पर घना अँधेरा छा गया। समीर ने पीछे मुड़कर यात्री को देखने की कोशिश की, लेकिन अँधेरे में उसका चेहरा साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। वह यात्री पूरी तरह से खामोश बैठा था, उसने रास्ते में एक भी शब्द नहीं कहा।
करीब आधे घंटे बाद, समीर को लगा कि उसे थोड़ी बात करनी चाहिए। “बाबूजी, आप कहाँ से आ रहे हैं? इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे थे?”
पीछे से कोई जवाब नहीं आया। समीर ने फिर पूछा, “बाबूजी, सब ठीक है?”
इस बार, यात्री की आवाज़ आई, जो अब पहले से भी ज़्यादा धीमी थी, “चलो… बस चलते रहो।”
समीर को अजीब लगा। उसने सोचा कि शायद यात्री बीमार है या किसी परेशानी में है। उसने आवाज़ तेज़ की और रेडियो ऑन कर दिया। रेडियो पर कोई पुराना भक्ति गीत बज रहा था।
लेकिन जैसे ही भक्ति गीत शुरू हुआ, समीर को पिछली सीट से एक हल्की सी सराहट की आवाज़ आई, जैसे कोई कपड़ा फट गया हो। और तभी, वैन के अंदर एक असहनीय ठंडक महसूस हुई, भले ही रात ठंडी थी, लेकिन यह ठंडक बिलकुल अलग थी, जैसे बर्फ की तरह। समीर ने तुरंत रेडियो बंद कर दिया। ठंडक धीरे-धीरे कम हुई, लेकिन समीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे।
उसने सोचा कि यह सब उसका वहम है। उसने अपनी नज़र सड़क पर टिकाई और तेज स्पीड में गाड़ी चलाने लगा, ताकि जल्द से जल्द यह 101 किलोमीटर की दूरी तय हो जाए।
101 KM का रहस्य: यात्री कहाँ गया? | Real Horror Story in Hindi
समय बीतता गया। समीर ने घड़ी में देखा, करीब 2:00 बज चुके थे। वह यात्री अभी भी खामोश था। समीर ने एक मोड़ लिया और सामने की सड़क पर अपनी हेडलाइट की रोशनी डाली। सामने एक मील का पत्थर था, जिस पर मराठी में लिखा था: “शिरडी – 10 KM”।
समीर ने राहत की साँस ली और पीछे मुड़कर यात्री से पूछा, “बाबूजी, शिरडी बस 10 किलोमीटर दूर है। क्या आपको मंदिर के पास छोड़ना है?”
कोई जवाब नहीं।
समीर ने फिर पूछा, “बाबूजी?”
अभी भी कोई जवाब नहीं।
समीर को गुस्सा आने लगा। उसने गाड़ी धीमी की और फिर जोर से बोला, “बाबूजी, आपका स्टेशन आने वाला है! अब तो कुछ बोलिए!”
अचानक, समीर को लगा कि पिछली सीट से कोई आवाज़ नहीं आ रही है। अजीब सी खामोशी थी। समीर ने अपनी टॉर्च उठाई और पिछली सीट की तरफ घुमाई।
पिछली सीट पूरी तरह खाली थी।
समीर का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उसने ब्रेक लगाया, जिससे टायर ज़ोर से ज़मीन पर घिसटे। उसकी वैन सड़क के बीचों-बीच रुक गई। उसने टॉर्च की रोशनी पूरी वैन में घुमाई—आगे की सीट, पिछली सीट, दरवाजे… यात्री कहीं नहीं था।
“यह कैसे हो सकता है?” समीर ने खुद से फुसफुसाते हुए कहा। उसने दरवाज़ा खोला और डर के मारे बाहर निकल आया। वह सड़क पर खड़ा था, चारों तरफ घना अँधेरा और सुनसान जंगल।
उसने जल्दी से पिछली सीट का दरवाज़ा खोला और अंदर झुककर देखा। कोई नहीं था। लेकिन तभी, उसकी नज़र वैन के मीटर पर पड़ी।
मीटर पर ठीक 101.0 किलोमीटर की रीडिंग दिखाई दे रही थी।
मीटर और धब्बा: खौफनाक सुराग
समीर अब डर से काँप रहा था। उसने दरवाज़ा बंद किया और तुरंत गाड़ी स्टार्ट करके वहाँ से भागने लगा। उसने सोचा कि यह कोई haunted taxi story है। उसे लगा कि वह पागल हो रहा है।
तेज स्पीड में गाड़ी चलाते हुए वह शिरडी पहुँचा। यहाँ थोड़ी भीड़ थी, जिससे उसे थोड़ी राहत मिली। उसने शिरडी पुलिस स्टेशन के बाहर गाड़ी रोकी और तुरंत अंदर जाकर सारी बात बताई। पुलिस वालों ने उसकी कहानी पर विश्वास नहीं किया, और उन्हें लगा कि समीर या तो नशे में है या किसी सदमे में है। एक हवलदार ने कहा, “तुम जुन्नार वापस जाओ, समीर। ज्यादा रात हो गई है, इसलिए तुम्हें वहम हो रहा है।”
हवलदार ने उसे चाय पिलाई और शांत होने को कहा। समीर जब थोड़ा शांत हुआ, तो उसने अपनी वैन के मीटर की रीडिंग और यात्री के गायब होने पर जोर दिया।
हवलदार ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया, लेकिन फिर भी उसके साथ वैन चेक करने के लिए बाहर आया। जैसे ही हवलदार ने वैन के पिछले दरवाज़े खोले, उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
वैन की पिछली सीट पर, जहाँ यात्री बैठा था, ठीक उसी जगह पर खून का एक गहरा, पुराना धब्बा था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने ज़ोर से सीट पर सर पटक दिया हो।
हवलदार डर गया। उसने तुरंत अपने सीनियर ऑफिसर को बुलाया। Real Horror Story in Hindi
अतीत की गूँज: समीर की खोज
अगली सुबह, पुलिस ने जुन्नार और शिरडी के बीच के 101 किलोमीटर के रास्ते पर छानबीन शुरू कर दी। उन्होंने समीर से यात्री का हुलिया पूछा। समीर ने बताया कि वह 50-55 साल का था, सफेद कपड़े पहने था और बहुत शांत था।
जाँच में पता चला कि लगभग 10 साल पहले, उसी 101 किलोमीटर के रास्ते पर एक भयानक हादसा हुआ था। एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में एक 52 साल के व्यक्ति भी थे, जिनका नाम हरिभाऊ था। हरिभाऊ शिरडी में अपने बीमार बेटे से मिलने जा रहे थे। उनकी पहचान कपड़ों और हुलिए से की गई थी—सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर टोपी।
लेकिन सबसे भयानक खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने समीर के मीटर की रीडिंग चेक की। समीर के मीटर में जहाँ यात्री बैठा था, वहाँ तक की दूरी ठीक 101.0 किलोमीटर थी, और वह दुर्घटनास्थल जुन्नार से ठीक 101 किलोमीटर की दूरी पर था।
यानी, समीर ने जिस यात्री को बैठाया था, वह कोई और नहीं, बल्कि वह श्रापित आत्मा थी जो उस दुर्घटना में अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाई थी। ऐसा लग रहा था जैसे आत्मा को मोक्ष पाने के लिए उसी रूट पर 101 किलोमीटर की यात्रा पूरी करनी थी। यह एक unique real horror story in Hindi बन गई थी।
समीर का संघर्ष: शापित यात्रा का बोझ
पुलिस ने समीर को मानसिक तौर पर ठीक होने के लिए कुछ दिन की छुट्टी दे दी। खून का धब्बा साफ़ कर दिया गया, और समीर ने अपनी टैक्सी बेच दी। वह अब रात में काम नहीं करता था, और कोशिश करता था कि उस घटना के बारे में कम से कम सोचे।
लेकिन वह 101 KM का अनुभव समीर की आत्मा में बैठ गया था। वह रात में सो नहीं पाता था। उसे अक्सर अपने कानों में वही धीमी, फुसफुसाहट वाली आवाज़ सुनाई देती थी: “चलो… बस चलते रहो…”
समीर की पत्नी, नेहा, ने देखा कि समीर बदल गया है। वह हर समय डरा हुआ और चुपचाप रहता था। उसने समीर को बहुत समझाया और उसका इलाज करवाया, लेकिन समीर की मानसिक शांति छिन चुकी थी।
एक रात, समीर अपने घर की छत पर अकेला बैठा था। हवा में वही पुरानी, अजीब सी महक आई—पुरानी मिट्टी और बासी फूलों की। समीर ने तुरंत चारों तरफ देखा। कोई नहीं था। तभी, उसे लगा जैसे कोई उसके कंधे पर हाथ रख रहा हो।
उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह जानता था कि वह कौन था।
धीमी, फुसफुसाहट वाली आवाज़ उसके कान में आई: “यात्रा पूरी हो गई… अब… तुम मेरी यात्रा शुरू करो।”
समीर काँप उठा। वह उठकर भागने ही वाला था कि तभी उसे छत की मुंडेर पर, जहाँ से वह बस स्टैंड को देख सकता था, वह यात्री खड़ा दिखाई दिया—वही सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी।
समीर ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और चिल्लाने लगा। उसकी आवाज़ सुनकर उसकी पत्नी और पड़ोसी ऊपर भागे। जब वे छत पर पहुँचे, तो समीर ज़मीन पर बेहोश पड़ा था।
खुला अंत: क्या यात्रा वाकई खत्म हो गई?
समीर को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे सामान्य बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि समीर सदमे में है।
जब समीर कुछ दिनों बाद होश में आया, तो उसने अपनी पत्नी नेहा से सिर्फ एक ही बात कही: “नेहा, मेरा मीटर बंद मत करना। मेरी यात्रा अभी… शुरू हुई है।”
समीर आज भी जुन्नार में रहता है। उसने अपनी जिंदगी सामान्य कर ली है, वह दिन में काम करता है और रात में घर आता है। लेकिन गाँव के लोग आज भी फुसफुसाते हैं कि समीर की आँखों में एक अजीब सी चमक है, और वह अक्सर अकेला बैठकर किसी से बात करता रहता है।
कभी-कभी, आधी रात को, जुन्नार से शिरडी जाने वाली सुनसान सड़क पर, कुछ लोगों ने एक पुरानी मारुति ओमनी वैन को तेज़ी से गुज़रते देखा है, जिसकी पिछली सीट पर कोई नहीं बैठा होता। वैन के मीटर पर हर रात ठीक 101.0 किलोमीटर की रीडिंग दर्ज होती है।
क्या हरिभाऊ की आत्मा ने अपनी यात्रा पूरी कर ली थी, या उसने समीर को अपनी अगली यात्रा का सारथी बना लिया है? यह सस्पेंस हॉरर कहानी आज भी जुन्नार के लोगों के लिए एक अनसुलझा रहस्य है।





