3. कचहरीबाड़ी: जुल्म और हवस की गूँज (The Kacheribari Spirits)
वेस्ट बंगाल के मलारपुर में स्थित ‘कचहरीबाड़ी’ दिखने में एक पुराना, खंडहर हो चुका घर है। लेकिन यह अपने अंदर जमींदारों के जुल्म और हवस के कई काले राज छुपाए बैठा है।
कचहरीबाड़ी कई सालों पहले जमींदारों का कोर्ट हाउस हुआ करता था, जहाँ वे अपनी अदालत लगाते थे। पर साथ ही, यह उनकी अय्याशी का अड्डा भी था। माना जाता था कि जमींदार वहाँ इकट्ठा होकर शराब पीते थे और मौज-मस्ती करते थे। जो भी लड़की उन्हें पसंद आती, वे उसे जबरदस्ती उठाकर वहाँ ले आते और नाचने वाली बनाकर उस घर में कैद कर लेते थे। कई सालों तक कचहरीबाड़ी में न जाने कितनी औरतों के साथ जुल्म हुए।
जैसे-जैसे जमींदारों की ताकत खत्म हुई, उनके परिवार वाले कचहरीबाड़ी छोड़कर चले गए। लेकिन पीछे छूट गई उन औरतों की आत्माएं, जिन्होंने जुल्म सहते-सहते वहीं दम तोड़ दिया था। कचहरीबाड़ी खाली होने के कुछ साल बाद जब इसे तोड़ने के लिए मजदूर आए, तो उन्हें वहाँ कई इंसानी हड्डियाँ मिलीं।
गांव वाले मानते थे कि उन्हीं नाचने वाली औरतों में से एक की आत्मा आज भी वहाँ भटकती है। अगर उसका भूत किसी को दिख जाए, तो उस आदमी का मरना पक्का हो जाता है।
यह real horror story रमेश (बदला हुआ नाम) नाम के एक किसान की है। रमेश इन कहानियों पर विश्वास नहीं करता था। एक रात, काम से थककर, उसने पक्की सड़क के बजाय कचहरीबाड़ी के बगीचे से गुजरता हुआ छोटा रास्ता लेने का सोचा।
जैसे ही वह बगीचे में घुसा, उसे वहां अजीब सा सन्नाटा और जंगली घास दिखी। उसे कोई पायल की आवाज नहीं सुनाई दी, सिर्फ रात के झिंगुरों की आवाजें। उसके मन का डर चला गया। लेकिन हवा में एक पुरानी, सड़ी हुई गंध थी। धूल मिट्टी से घिरा हुआ कचहरीबाड़ी उसे एक अजीब किस्म की खूबसूरती का एहसास दे रहा था।
वह कोर्ट हाउस के सामने रुक गया। तभी उसे एक पायल की हल्की सी छनकार सुनाई दी। छन… छन… रमेश को लगा कि शायद यह उसकी थकान का नतीजा है। उसने उसे नजरअंदाज कर दिया और आगे बढ़ने लगा।
वह बगीचे के अंत तक पहुंचने ही वाला था जब उसे लगा कि साथ वाली दीवार पर कुछ हलचल हुई है। उसने झटके से देखा तो वहां पर एक काली परछाई थी, जो धीरे से हिलती हुई दीवार के ऊपर जाकर रुक गई। रमेश हक्का-बक्का उसे देख रहा था।
तभी उसे पायल की तेज छनकार सुनाई दी और फिर धीरे-धीरे वो आवाज बढ़ती चली गई। अब उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उस कोर्ट रूम के अंदर नाच-गाना चल रहा हो। पसीने रमेश के छूटने लगे।
इससे पहले रमेश कुछ कर पाता, वो परछाई गायब हो गई और सारी आवाजें भी अचानक बंद हो गई। रमेश डरता हुआ थोड़ा आगे बढ़ा तो उसे फिर से पायल की झनकार सुनाई दी और न चाहते हुए भी उसकी आँखें दीवार के ऊपर चली गई…
वहां एक औरत बैठी हुई थी। उसके बड़े-बड़े और गहरे काले बाल थे, और बेहद ही सुंदर और गहरी आँखें। वो वहां बैठे हुए अपने पैर हवा में झुका रही थी। वो एक उदास सा गाना गुनगुना रही थी। अचानक वो हरिया को घूर कर देखने लगी और मुस्कुराने लगी। वो मुस्कुराहट देखकर हरिया को महसूस हुआ जैसे उसकी जिंदगी तबाह कर देगी।
लेकिन अचानक वो औरत गायब हो गई। रमेश वहां से भागने के लिए मुड़ा, लेकिन वो औरत उसके ठीक सामने आ गई! हड़बड़ी में वो कचहरीबाड़ी की ओर ही भागने लगा। तभी एकदम से उसके कदम रुक गए क्योंकि कचहरीबाड़ी के कोने वाले कमरे से सच में उसे कोई देख रहा था। उसे वहां एक बहुत ही डरावना आदमी दिखा… कहानियों के मुताबिक वो शायद किसी जमींदार का भूत था।
रमेश को उसे देखते ही यकीन हो गया कि कचहरीबाड़ी में कई सारी आत्माएं बसती हैं। वो उस आदमी को देखते ही जोर से चिल्लाया और वहां से भाग निकला। वह किसी तरह अपने घर पहुंच गया। रमेश उस दिन के बाद अकेला रहने लगा और डरा-डरा रहने लगा। उसकी यह कहानी पूरे गांव में फैल गई।
हरिया कमजोर होता रहा। कोई उससे कुछ पूछता तो वह बस यही जवाब देता, “वो कचहरीबाड़ी वाली औरत यहीं है और वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही है…”
हरिया की बीवी उसे कई पीर फकीर के पास ले गई, पर उसकी हालत और बिगड़ती गई। हर रात उसके घर से चिल्लाने की आवाजें आती। वह नींद में चिल्ला-चिल्ला के सबको बताता कि वो औरत उसके सपनों में आई है और वो उसे जान से मार देगी।
फिर एक दिन जब रमेश की बीवी खेत से वापस आई, तो उसे घर में अपने पति रमेश की लाश मिली। यह रमेश के साथ घटी एक ऐसी real horror story है जिस पर आज भी गांव के लोग यकीन करते हैं और कचहरीबाड़ी के पास जाने से कतराते हैं।





