Real Horror Story | प्रयागराज (इलाहाबाद) के छह युवा वकील – आशुतोष (आशु), राज, अतुल, जूली, पायल, और श्वेता – अपनी वकालत की पढ़ाई और करियर के पाँच सफल साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए उत्साहित थे। उनकी दोस्ती कचेहरी के गलियारों से लेकर कॉफी शॉप की मेज़ों तक फैली थी, और अब इस सफलता को यादगार बनाने का वक्त था।
सबने मिलकर हिमालय की गोद में बसी खूबसूरत जगह मसूरी जाने का फैसला किया। ट्रिप की तारीख तय हो गई, लेकिन एक बड़ी गाड़ी का इंतज़ाम करना बाकी था।
वरिष्ठ वकील की काली Fortuner और एक भयानक अतीत | Real Horror Story
आशुतोष, जो ग्रुप में सबसे ज़्यादा हिम्मती था, सीनियर वकील साहब के पास पहुँचा। सीनियर ने कुछ ही समय पहले एक दमकती, डार्क ब्लैक Fortuner खरीदी थी, जो सड़क पर शाही अंदाज़ में चलती थी। सीनियर वकील पहले तो आनाकानी करने लगे, लेकिन आशुतोष के बहुत मनाने पर उन्होंने चाबी देने का फैसला किया।
“ठीक है, ले जाओ। लेकिन एक शर्त है। इसे ले जाने से पहले, तुम्हें मेरी बात माननी होगी।” सीनियर की आवाज़ में एक अजीब-सी गंभीरता थी, जो उनकी सामान्य हंसी-मजाक से बिल्कुल अलग थी।
“सर, बोलिए। हम आपकी हर बात मानेंगे,” आशुतोष ने उत्साह से कहा।
सीनियर वकील ने धीमी आवाज़ में कहा, “यह गाड़ी… इसे पहले प्रयागराज संगम ले जाना। वहाँ गंगा जल से इसके टायरों को धोना, और फिर पास के प्रसिद्ध हनुमान जी के मंदिर में जाकर इसकी पूरे विधि-विधान से पूजा करवाना। जब तक पूजा न हो जाए, इसे शहर से बाहर मत निकालना। यह गाड़ी नई है, पर… इसका इतिहास थोड़ा भारी है।”
आशुतोष ने उस ‘भारी इतिहास’ को सीनियर का वहम या अंधविश्वास समझा, लेकिन चाबी लेने की ख़ातिर तुरंत हाँ कर दी।
टूटी शर्त और जर्नी की भयावह शुरुआत
दोस्तों ने मसूरी जाने की तारीख तय कर ली थी। निकलने की सुबह, सब कुछ जल्दबाजी में हुआ। आशुतोष ने जूली को उठाया, बाकी दोस्तों को इकट्ठा किया और सबने फटाफट सामान Fortuner में भरा।
वे सब सीनियर वकील की शर्त – संगम स्नान और हनुमान मंदिर की पूजा – को पूरी तरह भूल गए। उत्साह और जल्दबाजी में, उन्होंने बिना किसी धार्मिक अनुष्ठान के अपनी काली Fortuner को मसूरी के लिए रवाना कर दिया।
भाग I: सड़क पर अजीब नज़ारे और बेचैनी
जैसे ही वे प्रयागराज की सीमा से बाहर निकले, उन्हें पहला अजीब एहसास हुआ। एक भयंकर ट्रैफिक जाम में उनकी गाड़ी धीरे-धीरे रेंग रही थी, लेकिन हर गुज़रती गाड़ी का ड्राइवर, हर राहगीर और यहाँ तक कि सड़क किनारे खड़े बच्चे भी उनकी Fortuner को घूर-घूर कर देख रहे थे। उनकी निगाहों में प्रशंसा नहीं, बल्कि एक अजीब-सा डर और बेचैनी थी।
राज ने कहा, “यार, ये लोग ऐसे क्यों देख रहे हैं? क्या हम कोई VIP हैं?”
अतुल ने पीछे मुड़कर देखा। उसे लगा जैसे उसे खिड़की के कांच में गाड़ी की छत पर एक धुंधली-सी परछाईं दिखी, पर आँख झपकाते ही वह गायब हो गई। “शायद गाड़ी ज़्यादा चमचमा रही है,” उसने खुद को समझाया, पर उसके मन में एक गाँठ पड़ गई। Real Horror Story
अघोरी बाबा की डरावनी चेतावनी
करीब 350 कि.मी. आगे बढ़ने के बाद, रात का अंधेरा घना हो चुका था। अतुल ड्राइव कर रहा था। एक सुनसान, जंगल वाले पैच पर, बीच सड़क पर एक अघोरी बाबा खड़े थे। उनकी आँखें बड़ी और स्थिर थीं, और वह सीधे Fortuner की हेडलाइट्स में घूर रहे थे।
अतुल ने हॉर्न बजाया, लेकिन बाबा टस से मस नहीं हुए। मजबूरन, अतुल को गाड़ी रोकनी पड़ी।
बाबा सीधे ड्राइवर सीट के पास आए। उनके चेहरे पर राख लगी थी और उनकी आवाज़ गंभीर और तीखी थी।
“यह आधी रात का वक़्त है। तुम सब कहाँ जा रहे हो?”
“बाबा, मसूरी जा रहे हैं,” अतुल ने जवाब दिया।
बाबा ने घूरकर गाड़ी की छत की ओर देखा, फिर चिल्लाकर बोले, “वापस जाओ! अभी लौट जाओ! यह गाड़ी ख़ून की प्यासी है। तुमने पूजा नहीं करवाई… इसकी प्यास शांत नहीं हुई है! चाहे जो हो जाए, आज रात इस गाड़ी से बाहर मत निकलना!”
बाबा के चेहरे पर दिख रही भयावहता देखकर सबके रोंगटे खड़े हो गए। आशुतोष ने घबराकर पूछा, “बाबा, क्या गड़बड़ है?”
“तुम्हारी गाड़ी पर एक साया बैठा है, जो तुम में से किसी एक को अपना शिकार बनाएगा। गाड़ी में रहो और रोको मत!”
दोस्तों ने डरकर जल्दी से शीशे बंद किए और गाड़ी तेज़ी से भगा दी। अतुल ने पीछे मुड़कर देखा—बाबा अब भी उसी जगह खड़े थे, और इस बार वह अपनी उंगली से छत की ओर इशारा कर रहे थे।
भाग II: डरावने संकेत और आत्मा की उपस्थिति
थोड़ा आगे, एक सीधी सड़क पर, उनकी Fortuner के बगल से एक सफेद इनोवा गुज़रने लगी। इनोवा की को-ड्राइवर सीट पर एक महिला थी, जिसकी गोद में लगभग दो-तीन साल का एक बच्चा था।
जैसे ही दोनों गाड़ियाँ बराबर आईं, बच्चे की नज़र Fortuner पर पड़ी। बच्चा पहले तो एकदम शांत हुआ, फिर उसने इतनी ज़ोर से चिल्लाना शुरू कर दिया कि उसकी चीखें उनकी Fortuner के बंद शीशों को भेदकर अंदर तक सुनाई दीं। वह डरावनी आवाज़ में रो रहा था, जैसे उसने कोई भयंकर चीज़ देख ली हो।
बच्चे की माँ ने घबराकर Fortuner की तरफ देखा, उसकी आँखें डर से फैल गईं। उसने झटके से बच्चे को अपनी छाती से लगाया, और ड्राइवर को तेज़ी से गाड़ी भगाने का इशारा किया।
राज ने काँपते हुए कहा, “यार, ये क्या है? क्यों हर कोई हमारी ही गाड़ी से डर रहा है?”
रात का खाना खाने के लिए उन्हें एक अच्छा-सा ढाबा मिला। सबने चैन की साँस ली और गाड़ी चेक की। कुछ नहीं मिला। “सिर्फ़ कोइंसिडेंस है,” आशुतोष ने फिर सबको दिलासा दिया।
खाना खाते समय जूली अपने घर फ़ोन करने के लिए उठी, क्योंकि वहां नेटवर्क नहीं आ रहा था। वह Fortuner की तरफ़ गई।
जैसे ही वह गाड़ी के पास पहुँची, एक भयंकर चीख़ गूंजी और वह बेहोश होकर ज़मीन पर गिर गई।
जब सब भागकर पहुँचे, तो जूली ने बताया कि जैसे ही वह गाड़ी के पास आई, उसे लगा जैसे किसी ने उसके सीने पर ज़ोरदार वार किया हो। उसे ऐसा महसूस हुआ कि हवा में कोई है, पर दिखाई नहीं दिया।
जूली को उठाते समय, आशुतोष का हाथ गाड़ी के बम्पर के एक नुकीले हिस्से से कट गया। वह दर्द से कराह उठा, लेकिन जल्दबाज़ी में खून को पोंछकर उन्होंने ढाबे के अंदर आकर खाना खत्म किया।
गाड़ी फिर चल पड़ी। अब आशुतोष और जूली सबसे पीछे बैठे थे। आशुतोष को नींद आ गई। गहरी नींद में, उसे अपने कटे हुए हाथ पर गीलापन और अजीब-सी गुदगुदी महसूस हुई।
उसने आँखें खोली, तो अंधेरे में उसे लगा जैसे जूली का सिर उसके हाथ पर झुका हुआ है, और उसके चेहरे के पास से कुछ चाटने की आवाज़ आ रही है।
“जूली… क्या कर रही हो?” आशुतोष ने दबी आवाज़ में पूछा।
जूली ने कोई जवाब नहीं दिया। आशुतोष ने टॉर्च जलाई, तो देखा कि जूली सामान्य रूप से सो रही है, उसका सिर सीट पर टिका हुआ है। आशुतोष ने इसे थकान और कट के दर्द से उपजा भ्रम समझा, पर उसे वह गीला और चिपचिपा एहसास याद रहा।
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भाग III: मसूरी में आत्मा का कब्ज़ा
अगली सुबह वे मसूरी पहुँचे और एक बड़ा स्वीट रूम लिया। तय हुआ कि थकान मिटाने के लिए सब सोएंगे।
लगभग दो घंटे बाद, नीचे सो रहे राज की नींद अचानक खुली। कमरे में हल्की रोशनी थी। उसने देखा कि जूली पलंग पर बैठी है और अजीब तरह से झूल रही है। उसके मुँह से भारी, कर्कश आवाज़ में कुछ निकल रहा है।
राज ने आशुतोष और अतुल को उठाया। लड़कियाँ – पायल और श्वेता – कोने में बैठी, डरी हुई जूली को देख रही थीं।
जैसे ही अतुल जूली के करीब गया, जूली ने अपनी आवाज़ पूरी तरह से बदल ली। यह एक कठोर, पुरुषवादी आवाज़ थी।
“मैं… मैं बदला लूंगा! तुम सबने मेरी मौत का अपमान किया है! मुझे पूजा चाहिए थी! अब मैं इस शरीर को नहीं छोडूंगा!”
इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, भूतग्रस्त जूली ने भयंकर ताक़त से अतुल का गला पकड़ लिया! अतुल को लगा जैसे किसी लोहे के शिकंजे ने उसका गला जकड़ लिया हो।
आशुतोष ने तुरंत आगे बढ़कर जूली को खींचा। तभी उसे सीनियर वकील की बात याद आई—‘पूजा न करने पर… इसका इतिहास थोड़ा भारी है।’ उसे याद आया कि उसकी जेब में महाकालेश्वर का लॉकेट है।
उसने तुरंत लॉकेट निकालकर जूली के माथे पर छुआ दिया। लॉकेट छूते ही, जूली ने एक भयावह चीख़ मारी—वह आदमी की आवाज़ में चीखी, फिर सामान्य लड़की की आवाज़ में ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।
“मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा! मेरे साथ क्या हो रहा है! मेरा सिर फट रहा है!”
जैसे ही आशुतोष ने लॉकेट हटाया, पुरुष आत्मा फिर हावी हुई और उसने इस बार आशुतोष का गला पकड़ा।
पायल और श्वेता के डर के मारे चिल्लाने से होटल का स्टाफ भागा-भागा कमरे में आया। स्टाफ ने जब जूली की हालत देखी, तो वे तुरंत समझ गए।
स्टाफ का एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिसने ऐसी घटनाएँ देखी थीं, तुरंत बोला, “आप लोग तुरंत यहाँ से निकलो! इसे बाहरी साया लग गया है। इस सफ़र में कुछ बड़ी गड़बड़ हुई है। इस मैडम को लेकर हरिद्वार गंगा जी ले जाओ, तुरंत स्नान कराओ और उस गाड़ी की पूजा करवाओ। यह साया पूजा और पवित्रता से ही शांत होगा!”
सबके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत महाकालेश्वर का लॉकेट जूली को पहनाया, जिससे वह कुछ शांत हुई।
उपसंहार: सच और पश्चाताप
पूरी ट्रिप छोड़कर, वे सब जूली को लेकर हरिद्वार पहुँचे। सबने मिलकर जूली को गंगा जल में स्नान कराया। फिर वे एक स्थानीय मंदिर में गए, जहाँ पुजारी जी ने पूरे विधि-विधान से जूली की शुद्धि पूजा की, और अंत में, उस काली Fortuner की भी पूजा करवाई। जैसे ही Fortuner पर मंत्रों का जल छिड़का गया, गाड़ी के बोनट से एक पल के लिए अजीब-सी ठंडी भाप निकली, और सबने एक गहरी राहत महसूस की।
वे वापस प्रयागराज पहुँचे और सीनियर वकील को पूरी आपबीती सुनाई।
सीनियर वकील ने गहरी साँस ली और आँखें बंद कर लीं। “मैंने मना किया था। यह गाड़ी… इसे लेने के कुछ दिन बाद एक भयानक एक्सीडेंट हुआ था। हमने एक आदमी को कुचल दिया था, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मैंने महसूस किया था कि उसका साया गाड़ी के साथ है। इसीलिए मैंने पूजा की शर्त रखी थी। मुझे लगा था कि शायद पूजा से वह शांत हो जाएगा, लेकिन आप लोगों ने मेरी बात नहीं मानी।”
आशुतोष और उसके दोस्त सकते में थे। यह कोई कोइंसिडेंस नहीं था, यह सचमुच में सच्ची Real Horror Story थी।
आज भी, वे छहों दोस्त उस काली Fortuner को देखते हैं, तो काँप उठते हैं। उन्होंने न केवल सीनियर वकील की शर्त तोड़ी, बल्कि एक अशांत आत्मा को भड़का दिया था।





