2. बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन की भटकती आत्मा (The Begunkodar Ghost)
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन की कहानी पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यह कहानी एक टीटी (Ticket Collector) आकाश (बदला हुआ नाम) की है, जिसकी पोस्टिंग इस कथित भूतिया स्टेशन पर हुई थी।
रात का समय था। आकाश पहली बार एक रिक्शे में बैठकर स्टेशन जा रहा था। जैसे-जैसे स्टेशन नजदीक आ रहा था, रिक्शे वाला अजीब तरह से व्यवहार करने लगा। उसके चेहरे पर पसीना था और वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था। स्टेशन पर उतरते ही, रिक्शे वाला हड़बड़ी में पैसे मांगकर भाग गया, जैसे कोई साया उसका पीछा कर रहा हो। आकाश को यह व्यवहार अजीब लगा, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया।
स्टेशन के अंदर पहुंचकर आकाश को एक सफाई कर्मचारी मिला। उसने आकाश को स्टेशन और रेलवे क्वार्टर दिखाया। स्टेशन बिल्कुल सुनसान था। गौरव ने मजाक में पूछा, “क्या यहां हमेशा ऐसा ही सन्नाटा रहता है?”
कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए एक अजीब जवाब दिया, “साहब, कोई इंसान आए या ना आए, ‘वो’ तो जरूर आएगी।” इतना कहकर वह चुप हो गया और गौरव के लिए चाय लेने चला गया।
आकाश अपने ऑफिस में बैठा रजिस्टर्स अपडेट कर रहा था। तभी अचानक एक जोर का हॉर्न बजा। रात की पहली ट्रेन बेगुनकोडोर स्टेशन से गुजर रही थी। चार्ट के हिसाब से उसे रुकना चाहिए था, लेकिन वो बिना रुके आगे बढ़ने लगी।
आकाश ने प्लेटफार्म पर देखा। एक लड़की सफेद साड़ी में, ट्रेन के पीछे-पीछे उसे रोकने के लिए भाग रही थी। वह लड़की ट्रेन की रफ्तार से भी तेज दौड़ रही थी! आकाश उसे आवाज लगाने ही वाला था कि वो लड़की पलक झपकते ही गायब हो गई।
उसे लगा कि शायद यह उसकी आंखों का धोखा है। लेकिन आधे घंटे बाद एक और ट्रेन आई, और फिर वही लड़की प्लेटफार्म पर ट्रेन के पीछे भागती हुई दिखी। इस बार आकाश ने उसे आवाजें लगाईं, पर वह लड़की ट्रेन के पीछे दौड़ती हुई आगे निकल गई और फिर खो गई।
आकाश अब बुरी तरह घबरा गया था। उसने सोचा कि अगली ट्रेन का इंतजार वो प्लेटफार्म पर ही करेगा। करीब आधे घंटे बाद एक और ट्रेन आई। गौरव को स्टेशन पर खड़ा देख ड्राइवर ने ट्रेन को धीमा किया, लेकिन अचानक ड्राइवर के चेहरे का रंग उड़ गया। उसने फिर से ट्रेन की स्पीड बढ़ा दी और ट्रेन तेजी से निकल गई।
आकाश कुछ समझ पाता, तभी उसने देखा कि सफेद साड़ी पहने वही लड़की दौड़ती हुई आई और भागती हुई ट्रेन से भी आगे निकल गई! उसकी रफ्तार अकल्पनीय थी। आकाश सहम गया और दौड़कर अपने ऑफिस में घुस गया। उसने खुद को अंदर से बंद कर लिया।
वह अपनी चेयर पर बैठकर अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रहा था कि तभी उसे ऑफिस की खिड़की से प्लेटफार्म पर कुछ दिखा…
उसी लड़की का आधा कटा हुआ धड़, हाथों के बल प्लेटफार्म पर रेंग रहा था! उसकी भयानक आँखों में नफरत थी। आकाश का चेहरा पीला पड़ गया। वह जोर से चीखा और पीछे के दरवाजे से स्टेशन से बाहर भाग गया।
गौरव दौड़ता हुआ स्टेशन से दूर निकल गया। वहां उसे फुटपाथ पर सोया एक आदमी मिला। उस आदमी ने गौरव को बताया कि बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन सच में भूतिया है। उसने बताया कि करीब 50 साल पहले एक लड़की की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। तब से उसकी आत्मा रात में गुजरने वाली हर ट्रेन के सामने दौड़ती पाई जाती है।
उसने कहा कि आकाश से पहले कई लोग जो यहां काम करने आए, उन्होंने या तो अपना मानसिक संतुलन खो दिया या उनके साथ कोई दर्दनाक हादसा हुआ। आकाश ने यह सब सुना और उसी रात सब कुछ छोड़कर अपने गांव वापस लौट गया। उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, पर शायद उस स्टेशन को छोड़कर उसने अपनी जान बचा ली। क्या यह बेगुनकोडोर की real horror story सच है? वहां के लोग तो आज भी यही मानते हैं।





