वो जो सिर्फ अंधेरे में आती है. | A Real Horror Story in Hindi

कुर्सियोंग की एक धुंध भरी शाम और हवेली का वो खौफनाक अंधेरा... जानिए एक ऐसे साए की कहानी जिसे सिर्फ अंधेरे में देखा जा सकता था। यह real horror story आपके रोंगटे खड़े कर देगी।
real horror story
0
(0)

Real Horror Story | कुर्सियोंग (Kurseong) की सर्द और धुंध भरी शामें वैसे ही काफी डरावनी होती हैं, लेकिन उस पुरानी हवेली में रहने वाले परिवार के लिए सूरज ढलना किसी बुरे सपने के शुरू होने जैसा था। अगर आप कमजोर दिल के हैं, तो शायद यह real horror story आपको रात में अकेले सोने न दे।

शाम के 6 बज चुके थे। धुंध ने हवेली को चारों तरफ से घेर लिया था। काव्या और उसका छोटा भाई रोहन पागलों की तरह घर के हर कमरे की लाइट ऑन कर रहे थे।

“सब जगह की लाइट जल गई ना रोहन?” काव्या की आवाज में एक घबराहट थी। “हां दीदी… बस वो स्टोर रूम रह गया।” “क्या कर रहा है तू? बोला था ना कि घर का एक कोना भी अंधेरे में नहीं रहना चाहिए! जल्दी जा!” काव्या लगभग चीख पड़ी। उसे पता था कि अंधेरे का मतलब क्या है।

काव्या भागते हुए अपनी मां, नीता के कमरे में गई। वहां का नजारा देखकर उसके कदम ठिठक गए। कमरे की सारी बत्तियां बुझी थीं और नीता उस घने अंधेरे में खिड़की के पास शांति से बैठी थी।

“मम्मी! आप फिर अंधेरे में बैठी हैं? कितनी बार समझाऊं कि यह जानबूझकर मौत को बुलावा देना है?” काव्या ने झटके से स्विच ऑन किया। बल्ब की पीली रोशनी कमरे में फैल गई। नीता ने अपनी आंखें सिकोड़ लीं, “रोशनी से क्या हो जाएगा काव्या? जो होना है वो होकर रहेगा। वो आना बंद नहीं करेगी…” “पापा को मार डाला उसने! भूल गईं आप? मैं नहीं चाहती कि हमारा भी वही अंजाम हो!” काव्या का गला रुंध गया था। वह अपनी मां को वहीं छोड़कर बाकी घर चेक करने निकल गई।

अंधेरे की फुसफुसाहट | Real Horror Story

real horror story

काव्या के जाते ही हॉल की कुछ बत्तियां अचानक झपकने लगीं—फ्लिकर… फ्लिकर… और फिर एक भयानक सन्नाटा।

नीता अपने बिस्तर से उठी। तभी उसे कॉरिडोर के उस हिस्से से एक आवाज सुनाई दी, जहां अभी लाइट नहीं जली थी। छर्र… छर्र… (जैसे कोई अपने लंबे नाखूनों को दीवार पर घिसते हुए चल रहा हो)।

नीता दरवाजे के पास जाकर खड़ी हो गई। अंधेरे में से एक फुसफुसाहट आई, बेहद ठंडी और कर्कश आवाज में: “नीता… मुझसे मिलने नहीं आओगी? आ जाओ… मेरे पास आओ…”

नीता सम्मोहित सी उस अंधेरे की ओर बढ़ने लगी। हवा में अचानक सड़े हुए मांस और सीलन की बदबू फैल गई। और तभी, उस घने अंधेरे में दो चमकती हुई सफेद आंखें उभरीं। वो सारा थी। उसकी त्वचा जगह-जगह से जली हुई थी, जैसे किसी ने उसे जिंदा आग में फेंक दिया हो। उसके होंठ गायब थे और दांतों का एक भयानक ढांचा मुस्कुरा रहा था।

“तुम डर रही हो मुझसे?” सारा की आवाज सीधे नीता के दिमाग में गूंजी। “नहीं… हम दोस्त हैं ना।” नीता ने कांपते हुए कहा। “तो तुम मेरे साथ क्यों नहीं रहती? यहां ये दूसरे लोग भी रहते हैं… जो बार-बार लाइट जलाकर मुझे भगाते हैं। मेरी आंखों में जलन होती है नीता। मुझे उनसे नफरत है। उन सारी लाइटें को बंद कर दो ना… फिर हम हमेशा साथ रहेंगे।”

सारा का जला हुआ हाथ नीता की तरफ बढ़ ही रहा था कि तभी रोहन की दिल दहला देने वाली चीख गूंजी!

खौफनाक हमला

“दीदी! बचाओ!”

काव्या भागते हुए स्टोर रूम के पास पहुंची। वहां का बल्ब फ्यूज हो चुका था। रोहन जमीन पर पड़ा तड़प रहा था। अंधेरे में कोई चीज उसके सीने पर बैठी थी। काव्या ने तुरंत अपनी पावरफुल टॉर्च ऑन की और उस रोशनी के पड़ते ही एक भयानक चीख गूंजी। वो साया धुएं की तरह हवा में गायब हो गया।

रोहन बुरी तरह खांस रहा था। उसके गले पर किसी के तेज नाखूनों के नीले निशान छप गए थे।

इस घटना के बाद काव्या का गुस्सा फूट पड़ा। “मम्मी, अब और नहीं! आपको बताना ही होगा कि वो कौन है और हमें क्यों मारना चाहती है!”

नीता रो पड़ी। उसने आखिरकार वो राज खोल दिया जो उसने सालों से सीने में दफन कर रखा था। यह कोई आम प्रेत-बाधा नहीं थी, बल्कि एक ऐसी real horror story थी जिसकी शुरुआत एक अस्पताल से हुई थी।

सेफ हाउस का वो खौफनाक सच

“तुम्हारे पापा से शादी के कुछ साल बाद, मुझे एक गंभीर स्किन कैंसर हो गया था,” नीता ने बताना शुरू किया। “इलाज के साइड इफेक्ट से मेरी बॉडी रोशनी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाती थी। मुझे डॉक्टरों ने डेढ़ साल के लिए एक डार्क ‘सेफ हाउस’ में रखा था।”

उस सेफ हाउस के घने अंधेरे में नीता की मुलाकात ‘सारा’ से हुई थी। सारा को एक रेयर जेनेटिक बीमारी थी। उसने अपनी पूरी जिंदगी उसी अंधेरे कमरे में बिताई थी। उसने कभी सूरज नहीं देखा था। वो दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए। लेकिन जब नीता ठीक होकर अपने घर वापस आने लगी, तो सारा पागल हो गई।

“मेरे जाने के बाद वो सेफ हाउस से भाग निकली… मुझे ढूंढने के लिए। लेकिन बाहर तेज धूप थी। सूरज की किरणों ने उसके शरीर को जिंदा जला दिया… वो तड़प-तड़प कर मर गई। लेकिन उसकी आत्मा मुझे ढूंढते हुए यहां आ गई।”

यह सुनकर काव्या के रोंगटे खड़े हो गए। जिस चीज से वो लड़ रहे थे, वो कोई आम भूत नहीं, बल्कि उनकी मां की एक जुनूनी, मरी हुई दोस्त थी, जो अब एक खौफनाक शैतानी ताकत बन चुकी थी।

पापा की डायरी और यूवी (UV) लाइट

अगली सुबह काव्या ने घर का कोना-कोना छान मारा और आखिरकार उसे अपने पापा की वो सीक्रेट डायरी मिल गई। डायरी का आखिरी पन्ना खौफनाक सच्चाइयों से भरा था:

“सारा बाहर से नहीं आती। वो हमेशा घर के अंदर ही रहती है। वैम्पायर्स की तरह वो दिन में अपने ‘कॉफिन’ में सोती है। लेकिन वो हर रोज अपना ठिकाना बदलती है। उसे ढूंढने का सिर्फ एक तरीका है—यूवी (UV) लाइट्स। उसकी सुपरनैचुरल एनर्जी के निशान सिर्फ यूवी रोशनी और घने अंधेरे में ही देखे जा सकते हैं। उसे हराने के लिए उसे एक ऐसी तेज रोशनी (धूप) के सामने लाना होगा, जहां से वो भाग न सके।”

काव्या समझ गई। रात में सारा का सामना करना मौत को गले लगाना था। जो करना था, दिन में ही करना था।

दिन का शिकार (The Daylight Hunt)

काव्या और रोहन ने मिलकर घर की सारी खिड़कियों और दरवाजों पर मोटे काले कंबल टांग दिए। दिन के 12 बजे ही पूरे घर में अमावस्या की रात जैसा घुप अंधेरा हो गया।

“अब यूवी टॉर्च ऑन कर,” काव्या ने फुसफुसाते हुए कहा।

टॉर्च की नीली रोशनी जैसे ही जमीन पर पड़ी, दोनों की सांसें अटक गईं। पूरे घर के फर्श, दीवारों और यहां तक कि छतों पर भी उल्टे लटके हुए पैरों के निशान थे! वो निशान एक अजीब से नीयन (Neon) हरे रंग में चमक रहे थे।

“ये निशान जहां सबसे ज्यादा डार्क हैं, वो वहीं है,” काव्या ने कहा।

वो उन चमकते निशानों का पीछा करते हुए सीढ़ियों के नीचे बनी एक छोटी सी ढलान वाली जगह पर पहुंचे। वहां एक पुराना लकड़ी का बड़ा संदूक रखा था। यूवी लाइट में उस संदूक के चारों तरफ खरोंच और हाथों के भयानक निशान चमक रहे थे। सारा उसी के अंदर थी।

हवा अचानक बर्फीली हो गई। संदूक के अंदर से किसी के धीमे-धीमे खुरचने की आवाज आने लगी—स्क्रैच… स्क्रैच… “रोहन, खिड़की का कंबल खींचने के लिए तैयार रह,” काव्या ने एक गहरी सांस ली।

काव्या ने संदूक का लॉक खोला और एक झटके से उसका ढक्कन पलट दिया। अंदर सारा सिकुड़ कर लेटी थी। उसकी वो खौफनाक सफेद आंखें अचानक खुलीं और उसने काव्या की तरफ छलांग लगा दी!

“रोहन, अभी!”

रोहन ने पूरी ताकत से खिड़की का मोटा कंबल खींच लिया। दोपहर के सूरज की तेज, चिलचिलाती किरणें सीधे सारा के ऊपर पड़ीं।

हवेली एक ऐसी दिल दहला देने वाली चीख से गूंज उठी, जिसने कांच के बर्तन तक चटका दिए। धूप के संपर्क में आते ही सारा की जली हुई त्वचा में से आग की लपटें निकलने लगीं। वो हवा में तड़पते हुए जलने लगी और कुछ ही सेकंड्स में फर्श पर सिर्फ काली राख का एक ढेर रह गया।

नीता काफी देर तक उस राख के पास बैठकर रोती रही। आज उसने एक बार फिर अपनी दोस्त को खो दिया था, लेकिन इस बार हमेशा के लिए। हवेली में अब रोशनी थी, लेकिन उस कोने में आज भी एक अजीब सी ठंडक महसूस होती है।

अगर आपको लगता है कि अंधेरे में आप अकेले हैं, तो एक बार पीछे मुड़कर जरूर देखें। शायद यह real horror story सिर्फ एक कहानी न हो।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

As you found this post useful...

Follow us on social media!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *