Real Incident Horror Story: Hostel के Fourth Floor का राज

यह Real Incident Horror Story एक hostel के Fourth Floor की डरावनी घटना, एक रहस्यमय shadow और वर्षों पुराने खौफनाक राज की कहानी बताती है।
Real Incident Horror Story of a haunted hostel fourth floor
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Hostel Fourth Floor Horror Story | Real Incident

Real Incident Horror Story - Hostel Fourth Floor

रात के करीब 11 बजे पाँच दोस्त एक सुनसान hostel के चौथे floor पर बैठे थे।

सामने खाना रखा था।
कुछ bottles पड़ी थीं।
चारों तरफ अंधेरा था।

उन्हें लगा था कि यह रात बाकी रातों जैसी ही होगी।

लेकिन कुछ ही मिनट बाद उनमें से एक लड़के ने अपनी गर्दन के पास अचानक बर्फ जैसी ठंड महसूस की।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

वहाँ कोई नहीं था।

कुछ देर बाद दूसरे दोस्त ने कहा—

“तुम लोगों ने अभी किसी को भागते हुए देखा?”

सबने एक-दूसरे की तरफ देखा।

किसी ने जवाब नहीं दिया।

फिर corridor के बिल्कुल आखिरी छोर से एक लड़के के रोने की आवाज आई।

और उसके बाद…

एक shadow उनकी तरफ दौड़ने लगी।

अगर आपको लगता है कि horror stories सिर्फ फिल्मों में होती हैं, तो इस real incident horror story को अंत तक पढ़िए।

क्योंकि इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा वह नहीं है जो उन पाँच दोस्तों ने उस रात देखा।

सबसे डरावनी बात यह है कि उन्हें बाद में पता चला कि उस चौथे floor पर सालों पहले क्या हुआ था।

एक सवाल है—अगर आपको रात में किसी खाली corridor से “बचाओ” की आवाज सुनाई दे, तो क्या आप दरवाजा खोलेंगे?


वह लड़का जिसे आज भी वह रात सोने नहीं देती

इस कहानी का केंद्र एक युवक है, जिसे source material में अनिरुद्ध के नाम से बताया गया है।

उस समय वह बिहार के दरभंगा जिले से था और पटना के एक reputed college में Information Technology की पढ़ाई करने आया था।

बाद में वह software engineer बना।

लेकिन कॉलेज के दिनों में उसके साथ जो घटना बताई गई, उसका असर इतना गहरा था कि वर्षों बाद भी उसे उस रात को याद करने में परेशानी होती थी। Source account के अनुसार, उसने बताया कि उस घटना को याद करने पर उसे रात में नींद तक नहीं आती थी।

यह कहानी हमें सीधे उसी समय में ले जाती है।

साल था 2011।

अनिरुद्ध ने college में admission लिया और hostel में रहने पहुंचा।

उसे क्या पता था कि जिस hostel को वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत समझ रहा है…

वहीं एक ऐसा floor भी था, जिसके बारे में लोग रात में बात करने से बचते थे।


Hostel की पहली warning

Hostel में पहुंचते ही warden ने उसे room allot किया।

Room था—

201.

सामान्य instructions देने के बाद warden ने अचानक एक बात बहुत गंभीर होकर कही।

“चौथे floor पर मत जाना।”

अनिरुद्ध ने सोचा, आखिर क्यों?

Warden ने बताया कि वहां electricity नहीं रहती थी।

Corridor पूरी तरह अंधेरा रहता था।

अगर दिन में कभी कोई जरूरी काम हो तो तीन-चार लोगों के साथ जाना।

लेकिन रात में?

बिल्कुल नहीं।

यह बात अनिरुद्ध के लिए थोड़ी अजीब थी।

क्योंकि अगर fourth floor पर rooms बने हुए थे, तो वहां जाने से इतनी सख्ती क्यों?

उसने दोबारा पूछना चाहा।

लेकिन warden का चेहरा देखकर उसने सवाल वहीं रोक दिया।

उसी समय एक और नया student वहां खड़ा था।

उसका नाम देवेंद्र था।

उसने भी यह बात सुनी।

और शायद उसी पल दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई।


Fourth Floor आखिर इतना डरावना क्यों था?

देवेंद्र को room 202 मिला।

अनिरुद्ध 201 में चला गया।

उसके room में तीन और लड़के थे—जीवन, प्रकाश और रंजन।

कुछ ही देर में चारों दोस्त बन गए।

बातों-बातों में fourth floor का topic फिर सामने आया।

लेकिन किसी के पास कोई clear answer नहीं था।

किसी ने कहा—

“शायद seniors का मामला होगा।”

किसी ने कहा—

“शायद ragging की वजह से।”

लेकिन असली जवाब किसी को नहीं पता था।

फिर शाम को सभी freshers को common hall में बुलाया गया।

उन्हें डर था कि seniors ragging करेंगे।

लेकिन वहां बिल्कुल उल्टा हुआ।

Seniors ने उनसे normal introduction लिया।

किसी ने hometown पूछा।

किसी ने course पूछा।

फिर छोटी-सी fresher party भी हुई।

माहौल इतना normal था कि अनिरुद्ध को लगा—

शायद fourth floor की पूरी कहानी सिर्फ अफवाह है।

लेकिन party खत्म होने से पहले उसने seniors से वही सवाल पूछ लिया।

“Sir… fourth floor पर जाने से मना क्यों किया जाता है?”

कुछ seniors चुप रहे।

फिर fourth floor पर रहने वाले तीन senior आगे आए।

उनके चेहरे पर मजाक नहीं था।

उन्होंने बताया कि रात होते ही उस corridor में अजीब सन्नाटा छा जाता है।

कई बार उन्हें ऐसा लगता था जैसे कोई corridor में दौड़ रहा हो।

कभी-कभी रोने की आवाज भी सुनाई देती थी।

और सबसे अजीब बात—

वहां की electricity बार-बार खराब हो जाती थी।

कई बार bulbs और wiring ठीक कराने की कोशिश की गई।

लेकिन रात में फिर वही अंधेरा।

उन seniors ने freshers से कहा—

“रात में वहां मत जाना।”

फिर उन्होंने एक ऐसी बात कही जिसे सुनकर सभी चुप हो गए।

कुछ लोग पहले वहां अकेले गए थे।

और उनके साथ अच्छा नहीं हुआ।


दस महीने तक सब ठीक रहा

इसके बाद जिंदगी सामान्य चलती रही।

अनिरुद्ध और उसके दोस्त पढ़ाई करने लगे।

Seniors से भी उनकी अच्छी दोस्ती हो गई।

पाँच दोस्तों का group इतना close हो गया कि वे हर जगह साथ रहने लगे।

खाना साथ।

घूमना साथ।

पढ़ाई साथ।

मजाक साथ।

और सबसे महत्वपूर्ण—

fourth floor का डर धीरे-धीरे उनके दिमाग से निकल गया।

दस महीने गुजर गए।

इस दौरान उन्होंने वहां कुछ असामान्य नहीं देखा।

न कोई आवाज।

न कोई shadow।

न कोई घटना।

इसलिए उन्होंने मान लिया कि शायद hostel management ने बस उन्हें डराने के लिए warning दी थी।

फिर आया—

May 2012.

College की छुट्टियां खत्म हो रही थीं।

अधिकतर students अपने घर चले गए।

कुछ seniors भी चले गए।

कुछ students वापस आने लगे।

लेकिन कुछ दिनों तक hostel लगभग खाली रहा।

और इसी खालीपन में उन पाँच दोस्तों को लगा कि आखिर थोड़ा मजा किया जाए।


वह रात जब उन्होंने चौथे floor को चुना

Mess बंद था।

इसलिए दोस्त पास के एक hotel से खाना लाने लगे।

उस रात उन्होंने मटन मंगवाया।

कुछ drinks लीं।

और देर रात party करने का plan बनाया।

लेकिन एक छोटी-सी बात शायद वे भूल चुके थे।

उन्होंने party के लिए fourth floor चुन लिया था।

रात करीब 10 बजे।

बाकी students अपने rooms में जा चुके थे।

चारों तरफ सन्नाटा था।

पाँचों दोस्त चौथे floor के dark corridor में बैठ गए।

उन्हें उस समय डर नहीं लग रहा था।

क्योंकि पिछले दस महीनों में कुछ हुआ ही नहीं था।

उनके सामने खाना था।

दोस्त आसपास थे।

हंसी-मजाक चल रहा था।

सब कुछ बिल्कुल normal था।

फिर…

करीब 11 बजे…

अनिरुद्ध को अपने पीछे से एक ठंडी हवा महसूस हुई।

सिर्फ हवा नहीं।

उसे लगा जैसे किसी ने उसके बाएं कान और कंधे के पास बर्फ रख दी हो।

उसने इसे ignore कर दिया।

शायद drinks की वजह से।

शायद imagination।

लेकिन करीब 15 मिनट बाद देवेंद्र अचानक पीछे मुड़ा।

“कौन था?”

सबने पूछा—

“क्या हुआ?”

देवेंद्र ने कहा कि उसे ऐसा लगा जैसे कोई उनके पीछे से दौड़कर गया।

प्रकाश ने तुरंत कहा—

“मुझे भी ऐसा ही लगा।”

अब अनिरुद्ध चुप नहीं रह सका।

उसने कहा—

“मुझे भी थोड़ी देर पहले ऐसा ही महसूस हुआ था।”

तीनों ने एक-दूसरे को देखा।

अब हंसी गायब हो चुकी थी।


फिर किसी ने देवेंद्र की गर्दन छुई

कुछ देर बाद देवेंद्र अचानक चिल्लाया—

“रंजन! अपनी hand हटाओ।”

रंजन ने हैरानी से पूछा—

“कौन-सा hand?”

देवेंद्र ने अपनी गर्दन पकड़ रखी थी।

उसने कहा—

“तुम मेरे पीछे हाथ क्यों रख रहे हो?”

रंजन ने अपने दोनों हाथ दिखाए।

उसके दोनों हाथ सामने थे।

फिर सबने देवेंद्र की गर्दन को छुआ।

वह हिस्सा असामान्य रूप से ठंडा था।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अभी-अभी वहां बर्फ रखी हो।

अब किसी को party जारी रखने का मन नहीं था।

प्रकाश ने कहा—

“जो भी है, छोड़ो। सामान उठाओ और नीचे चलते हैं।”

लेकिन तभी अनिरुद्ध को लगा…

कोई उसके ठीक पीछे खड़ा है।

उसने धीरे-धीरे गर्दन घुमाई।

कुछ नहीं।

पूरा corridor खाली।

लेकिन corridor के आखिरी हिस्से में…

उसे एक लड़के की shadow दिखाई दी।

एक लड़का।

बिल्कुल स्थिर।

उसकी गर्दन एक तरफ अजीब तरीके से झुकी हुई थी।

अनिरुद्ध उसे देखता रह गया।

और तभी—

रोने की आवाज आई।

एक लड़के की।

पहले धीमी।

फिर तेज।

फिर इतनी तेज कि पूरे corridor में गूंजने लगी।


“बचाओ… दरवाजा खोलो!”

अचानक वह shadow दौड़ने लगी।

और जैसे-जैसे वह corridor में दौड़ी…

एक-एक करके rooms के दरवाजों पर knocking होने लगी।

ठक!

ठक!

ठक!

फिर आवाज आई—

“बचाओ!”

कुछ सेकंड बाद—

“दरवाजा खोलो!”

और फिर—

“जल्दी करो… वो लोग मुझे मार डालेंगे!”

पाँचों दोस्त जैसे अपनी जगह जम गए थे।

किसी के पास बोलने की ताकत नहीं थी।

जिस fourth floor को वे मजाक समझ रहे थे…

वह अब उनके सामने जिंदा हो चुका था।

सोचिए—आपके सामने एक खाली corridor हो, लेकिन वहां से किसी की मदद की चीखें आती रहें। आप क्या करेंगे?


Bathroom में छिपे पाँच दोस्त

वे नीचे भागना चाहते थे।

लेकिन corridor पार करने की हिम्मत नहीं थी।

उन्हें लग रहा था कि वह shadow अभी भी वहां है।

इसलिए उन्होंने आखिरी bathroom में जाकर खुद को बंद कर लिया।

दरवाजा बंद।

पाँच लोग अंदर।

बाहर पूरा अंधेरा।

और फिर अगले करीब 45 मिनट तक…

उन्हें बाहर से दौड़ने की आवाजें सुनाई देती रहीं।

दरवाजों पर knocking।

किसी के रोने की आवाज।

और बीच-बीच में ऐसा लगता जैसे कोई corridor में तेजी से भाग रहा हो।

फिर अचानक सब बंद हो गया।

सन्नाटा।

इतना गहरा सन्नाटा कि पांचों को अपनी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।

करीब पांच मिनट इंतजार करने के बाद उन्होंने bathroom खोला।

बाहर कोई नहीं था।


लेकिन असली डर अभी बाकी था

दोस्त अपना सामान इकट्ठा करने लगे।

बोतलें।

खाने का सामान।

जो कुछ भी वहां था।

तभी अनिरुद्ध ने कहा कि उसे bathroom जाना है।

प्रकाश ने कहा—

“दरवाजा बंद मत करना।”

अनिरुद्ध अंदर चला गया।

Bathroom में भी वही अंधेरा था।

उसने washbasin के पास जाकर हाथ धोने शुरू किए।

और तभी…

Light flicker हुई।

अनिरुद्ध ठिठक गया।

Fourth floor पर बिजली नहीं थी।

फिर light कैसे जली?

उससे पहले कि वह कुछ समझ पाता…

किसी ने पीछे से उसका collar पकड़ लिया।

और इतनी ताकत से खींचा कि उसका शरीर पीछे जा गिरा।

वह basin से टकराया।

उसका हाथ घायल हो गया।

वह जमीन पर पड़ा दर्द से कराह रहा था।

फिर…

उसने सामने देखा।

एक लड़का खड़ा था।


वह लड़का कौन था?

Source account में उस figure का वर्णन एक बेहद सफेद, skeletal शरीर वाले लड़के के रूप में किया गया है।

उसकी गर्दन बुरी तरह एक तरफ झुकी हुई थी।

आंखें काली थीं।

और उसका चेहरा इंसानी होते हुए भी सामान्य नहीं लग रहा था।

अनिरुद्ध ने मदद के लिए चिल्लाने की कोशिश की।

लेकिन उसकी आवाज नहीं निकली।

बाहर उसके दोस्त bathroom का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन दरवाजा नहीं खुल रहा था।

फिर वह figure उसके पास आया।

उसने अनिरुद्ध का गला पकड़ लिया।

और उसे दीवार से ऊपर उठा दिया।

फिर उसने एक बात कही—

“तुम लोगों को यहां नहीं आना चाहिए था।”

अनिरुद्ध के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था।

उस figure की पकड़ और मजबूत होती गई।

उसकी आंखों के सामने सब धुंधला होने लगा।

और फिर…

उसे कुछ याद नहीं रहा।


अगली सुबह वह अस्पताल में था

जब अनिरुद्ध ने आंखें खोलीं, वह hostel में नहीं था।

वह hospital में था।

उसके दोस्त आसपास बैठे थे।

Doctor ने treatment किया था।

उसके शरीर में कमजोरी थी।

दोस्तों ने बताया कि उन्होंने bathroom का दरवाजा तोड़ने की बहुत कोशिश की थी।

Seniors को भी बुलाया गया।

लेकिन दरवाजा नहीं खुला।

फिर एक दोस्त को याद आया कि उसके पास थोड़ा Ganga water था।

उसने door पर पानी छिड़का।

और उसके बाद…

दरवाजा अपने आप खुल गया।

अंदर अनिरुद्ध बेहोश पड़ा था।

उसे hospital ले जाया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

असल में…

यहीं से कहानी और ज्यादा डरावनी हो गई।


वह चेहरा उसे बार-बार दिखाई देने लगा

Hospital से लौटने के कुछ दिन बाद भी अनिरुद्ध की हालत ठीक नहीं हुई।

वह बेहद कमजोर महसूस करने लगा।

फिर करीब एक सप्ताह बाद उसने अपने दोस्तों से कहा—

“मुझे वह लड़का फिर दिखाई दे रहा है।”

वह room में सीधे नहीं आता था।

लेकिन जब अनिरुद्ध corridor में जाता…

mess में जाता…

या किसी दोस्त के room में जाता…

उसे कहीं न कहीं वही figure खड़ा दिखाई देता।

बस दूर।

एक pillar के पास।

बिना कुछ किए।

सिर्फ उसे देखते हुए।

अब दोस्तों ने इसे मजाक नहीं समझा।

उन्होंने उसे hostel से बाहर निकालने का फैसला किया।

कुछ समय के लिए वह दोस्तों के साथ दूसरे घर में रहने लगा।

फिर धार्मिक विधि भी करवाई गई।

धीरे-धीरे उसकी हालत सुधरने लगी।

लेकिन दोस्तों के मन में एक सवाल अभी भी था—

आखिर fourth floor पर था कौन?


Real Incident Horror Story का सबसे डरावना सच

कुछ समय बाद जब college दोबारा खुला, देवेंद्र और प्रकाश अपना सामान लेने hostel वापस गए।

वहां warden ने उनसे पूछा—

“तुम लोगों ने hostel क्यों छोड़ दिया?”

दोनों ने पूरी घटना बता दी।

फिर देवेंद्र ने सीधा सवाल पूछा—

“Sir, आखिर वहां है कौन?”

Warden उन्हें staff office में ले गया।

वहां hostel के पुराने warden मौजूद थे।

उनका नाम source account में दीनानाथ मिश्रा बताया गया है।

उन्होंने जो बताया…

उसे सुनकर दोनों दोस्तों के पैरों तले जमीन खिसक गई।


कहानी 2001 में वापस चली गई

पुराने warden ने बताया कि करीब 11 साल पहले fourth floor सामान्य था।

Rooms भरे रहते थे।

लेकिन साल 2001 में वहां एक student आया था।

उसका नाम था—

Aman.

उसे room number 405 मिला।

वह शांत स्वभाव का लड़का था।

सबके साथ हंसता-बोलता था।

लेकिन उस समय hostel में ragging बहुत ज्यादा थी।

चार seniors उसे लगातार परेशान करने लगे।

पहले ragging छोटी चीजों से शुरू हुई।

फिर धीरे-धीरे वह torture में बदल गई।

Aman के roommates भी परेशान होकर दूसरे floors पर चले गए।

और आखिर में वह room 405 में अकेला रह गया।

अब seniors के लिए वह आसान target बन चुका था।

उसे parties में सामान लाने के लिए मजबूर किया जाता।

उसे अपमानित किया जाता।

उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता।

Source account में यहां तक बताया गया है कि उसे leash पहनाकर corridor में घुमाया गया था।

Aman सब सहता रहा।

शायद उसे उम्मीद थी कि कोई उसकी मदद करेगा।

लेकिन…

उस रात कोई उसकी मदद करने नहीं आया।


वह आखिरी रात

एक रात seniors ने उसे rooftop पर बुलाया।

वह उनके सामने टूट चुका था।

उसने कहा कि अब वह college authorities से शिकायत करेगा।

सeniors डर गए।

उन्होंने उसे वापस चौथे floor पर खींचा।

Aman किसी तरह उनसे बचकर corridor में भागा।

वह एक-एक करके rooms के doors knock करता रहा।

वह चिल्ला रहा था—

“मुझे बचाओ!”

लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला।

डर ने सभी को अंदर बंद कर रखा था।

कुछ देर बाद seniors ने उसे पकड़ लिया।

Source account के अनुसार, उन्होंने उसे जबरन शराब पिलाई और बाद में rooftop से नीचे फेंक दिया। फिर घटना को accident या intoxication से हुई मौत जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

और यहीं से उस hostel के fourth floor की कहानी बदल गई।


क्या हुआ उन seniors के साथ?

Source account में पुराने warden ने दावा किया कि Aman की मौत के बाद उन चार seniors के साथ भी असामान्य घटनाएं होने लगीं।

तीन seniors ने बाद में उसी तरह rooftop से छलांग लगा दी।

चौथा senior डरकर police के सामने confession करने पहुंचा।

इसके बाद fourth floor को permanently बंद कर दिया गया।

किसी को वहां रहने की अनुमति नहीं थी।

और जिस room में Aman रहता था…

वह था—

Room 405.

वही room जिसके सामने…

कई साल बाद पांच दोस्त बैठकर party कर रहे थे।


लेकिन सबसे बड़ा डर भूत नहीं था

इस पूरी कहानी को पढ़कर शायद आपके दिमाग में सबसे पहला सवाल आएगा—

“क्या सच में वहां Aman की spirit थी?”

इसका निश्चित जवाब source material भी साबित नहीं करता।

लेकिन एक चीज बिल्कुल साफ है।

इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा कोई ghost नहीं है।

सबसे डरावना हिस्सा वह इंसानी व्यवहार है जिसने पूरी tragedy को जन्म दिया।

Ragging मजाक नहीं है।

किसी नए student को डराना, अपमानित करना, physically या mentally torture करना कोई tradition नहीं है।

यह किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकता है।

और कभी-कभी…

उसका असर सिर्फ victim पर नहीं पड़ता।

पूरी जिंदगी पर पड़ता है।


उस रात की सबसे खामोश चीख

कल्पना कीजिए।

एक लड़का corridor में भाग रहा है।

वह हर दरवाजे पर knock कर रहा है।

वह मदद मांग रहा है।

लेकिन अंदर बैठे लोग दरवाजा नहीं खोलते।

फिर वह लड़का मर जाता है।

साल गुजर जाते हैं।

Hostel बदल जाता है।

Students बदल जाते हैं।

Rooms बदल जाते हैं।

लेकिन एक corridor…

वहीं रह जाता है।

और शायद यही वजह है कि इस कहानी का fourth floor आज भी इतना unsettling लगता है।

क्योंकि कभी-कभी किसी जगह का डर उसकी दीवारों में नहीं…

उसकी कहानी में छिपा होता है।


अगर आप hostel में रहते हैं तो यह बात याद रखें

इस story को सिर्फ horror entertainment की तरह पढ़कर आगे मत बढ़िए।

अगर आपके college या hostel में किसी student को ragging के नाम पर परेशान किया जा रहा है, तो चुप मत रहिए।

  • किसी trusted teacher या warden को बताएं।
  • अपने parents या guardians को inform करें।
  • College की official anti-ragging mechanism का इस्तेमाल करें।
  • जरूरत पड़ने पर authorities से मदद लें।
  • किसी victim को अकेला न छोड़ें।

क्योंकि उस रात Aman को सबसे ज्यादा जरूरत किसी supernatural power की नहीं थी।

उसे जरूरत थी…

एक इंसान की।

किसी एक ऐसे व्यक्ति की जो उसका दरवाजा खोल देता।


Conclusion: क्या वह Fourth Floor सच में haunted था?

आज भी इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या अनिरुद्ध और उसके दोस्तों ने जो देखा, वह सच में किसी spirit की मौजूदगी थी?

या डर, अंधेरा, environment और उस जगह की पुरानी कहानी ने उनके दिमाग पर असर डाला?

हम निश्चित रूप से नहीं कह सकते।

यह account एक व्यक्ति द्वारा बताए गए अनुभव पर आधारित है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि source material में नहीं दी गई है।

लेकिन एक बात जरूर सच है—

किसी भी horror story से ज्यादा डरावनी वह वास्तविकता है जिसमें किसी कमजोर इंसान को सिर्फ इसलिए torture किया जाए क्योंकि वह विरोध नहीं कर सकता।

और शायद यही वजह है कि यह real incident horror story सिर्फ भूत की कहानी नहीं लगती।

यह एक warning लगती है।

एक reminder।

कि कुछ दरवाजे इसलिए बंद नहीं होते क्योंकि उनके पीछे भूत होता है।

कभी-कभी…

उनके पीछे एक ऐसी कहानी होती है जिसे लोग दोबारा याद नहीं करना चाहते।

और अगर कभी किसी सुनसान hostel corridor में रात के समय आपको लगे कि कोई आपके पीछे खड़ा है…

तो शायद सबसे पहले पीछे मुड़ने से पहले यह सोचिएगा—

“अगर सच में कोई हुआ तो?”

क्योंकि उस fourth floor पर बैठे उन पाँच दोस्तों ने भी शुरुआत में यही सोचा था कि…

“कुछ नहीं होगा।”

लेकिन उस रात के बाद…

उनमें से किसी ने भी उस वाक्य को पहले जैसा नहीं समझा।

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